कोरबा। तहसील करतला अंतर्गत ग्राम बांधापाली में इस वर्ष भी भव्य “नवरात्रि महोत्सव 2025” का आयोजन बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। मां बंधईरानी धाम में आयोजित यह धार्मिक पर्व क्षेत्र की आस्था का केंद्र बन चुका है। नौ दिनों तक चले इस महोत्सव में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कलश यात्रा से हुई शुभ शुरुआत
महोत्सव की शुरुआत नवरात्रि के छठवें दिन (28 सितम्बर 2025, रविवार) को कलश यात्रा एवं कलश स्थापना के साथ की गई। इस पवित्र अवसर पर सैकड़ों महिला श्रद्धालु सिर पर कलश लेकर पूरे ग्राम का भ्रमण करते हुए माता रानी के जयघोष लगाती रहीं। कलश यात्रा के बाद मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना और आरती के साथ आयोजन का शुभारंभ हुआ।
नौ दिनों तक गूंजे भक्ति गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ

नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन भजन-कीर्तन, आरती, कथा वाचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। ग्रामवासी, महिला मंडल और युवा समिति ने मिलकर इस आयोजन को विशेष रूप से सजाया। मंदिर परिसर में रंग-बिरंगी झालरें, दीपमालाएं और फूलों की सजावट ने वातावरण को दिव्य बना दिया।
हर शाम मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए भंडारा और प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई। सैकड़ों भक्त प्रतिदिन दर्शन और भंडारे का लाभ लेने पहुंचे।
अंतिम दिन हुआ हवन, सहस्त्रधारा और कन्या भोज
06 अक्टूबर 2025 (सोमवार) को नवरात्रि महोत्सव का मुख्य आयोजन संपन्न हुआ। सुबह से ही मंदिर में हवन, पूर्ण आहूति, कन्या भोज और सहस्त्रधारा का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दरबार में उपस्थित हुए और अपनी मनोकामनाएं मां बंधईरानी के चरणों में अर्पित कीं।
सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ बनी आकर्षण का केंद्र
इस वर्ष भी महोत्सव के दौरान झांकी प्रतियोगिता और जसगीत प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने भाग लेकर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। रात के समय रंगारंग मंचीय कार्यक्रमों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
शरद पूर्णिमा की रात को नाट्य कार्यक्रम का विशेष आयोजन रखा गया, जिसमें भक्तिमय कहानियों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
मां बंधईरानी की महिमा से जुड़ी लोकमान्यताएँ
ग्रामवासियों के अनुसार, मां बंधईरानी की कृपा से गांव सदैव समृद्ध बना रहता है। ग्रामीण बताते हैं कि जब भी गांव में अकाल या सूखे जैसी स्थिति बनती है, तब मां के दरबार में भजन-कीर्तन करने से वर्षा अवश्य होती है।
ग्राम के वरिष्ठ नागरिकों के अनुसार, 2015 में तत्कालीन सरपंच द्वारा मंदिर निर्माण का प्रस्ताव रखा गया और 2017 में भूमि पूजन कर निर्माण कार्य शुरू किया गया। तब से लेकर आज तक हर वर्ष नवरात्रि महोत्सव का आयोजन लगातार होता आ रहा है।
श्रद्धा और संस्कृति का संगम
मां बंधईरानी का यह मंदिर न केवल धार्मिक स्थल है बल्कि यह ग्रामीण एकता और संस्कृति का प्रतीक भी बन चुका है। यहां आयोजित महोत्सव से ग्रामवासी एकजुट होते हैं और अपनी परंपराओं को जीवंत रखते हैं।
श्रद्धालुओं ने बताया कि यह पर्व सिर्फ पूजा-पाठ का आयोजन नहीं, बल्कि समर्पण, एकता और आस्था का पर्व है। युवा वर्ग भी बढ़-चढ़कर इसमें हिस्सा ले रहा है, जिससे परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम दिखाई देता है।
सुरक्षा और सहयोग से बना अनुशासित आयोजन
कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में ग्राम समिति, युवा मंडल और पुलिस विभाग का भी विशेष सहयोग रहा। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही और पूरे आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया।
समापन पर झूम उठे श्रद्धालु
अंतिम दिन मां के जयकारों और भक्ति गीतों के बीच महोत्सव का समापन हुआ। जैसे ही विसर्जन यात्रा निकली, पूरा ग्राम “जय मां बंधईरानी” के नारों से गूंज उठा। श्रद्धालु नाचते-गाते, मां की आरती करते हुए यात्रा में शामिल हुए।







